ishq shayari part - 4

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dard shayari

आँखों के सामने हर पल आपको पाया है;
अपने दिल में सिर्फ आपको ही बसाया है;
आपके बिना हम जियें भी तो कैसे;
भला जान के बिना भी कोई जी पाया है।

मोहब्बत के लबोँ पर फिर वही तकरार बैठी है;
एक प्‍यारी सी मीठी सी कोई झनकार बैठी है;
तुझसे दूर रहकर के हमारा हाल है ऐसा;
मैँ तेरे बिन यहाँ तू मेरे बिन वहाँ बेकार बैठी है।

निकला करो इधर से भी होकर कभी कभी;
आया करो हमारे भी घर पर कभी कभी;
माना कि रूठ जाना यूँ आदत है आप की;
लगते मगर हैं अच्छे आपके ये तेवर कभी कभी।

बगैर जाने-पहचाने इक़रार ना कीजिये;
मुस्कुरा कर यूँ दिलों को बेक़रार ना कीजिये;
फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी;
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये।

आप को भूल जाऊं यह नामुमकिन सी बात है;
आप को न हो यकीन यह और बात है;
जब तक रहेगी साँस तब तक आप रहोगे याद;
टूट जाये यह साँस तो यह और बात है।

कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है;
कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है;
कब तक छुपाऊँ दिल की बात;
उसकी हर अदा पर मुझे प्यार आ जाता है।

मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है;
तो हर दुआ में बस तेरी वफ़ा माँगी है;
जिस प्यार को देख कर दुनिया वाले जलते हैं;
तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।

अजीब नशा है होशियार रहना चाहता हूँ;
मैं उस के ख़्वाब में बेदार रहना चाहता हूँ;
ये मौज-ए-ताज़ा मेरी तिश्नगी का वहम सही;
मैं इस सराब में सरशार रहना चाहता हूँ।

तेरे मिलने की आस न होती;
तो ज़िंदगी आज यूँ उदास न होती;
मिल जाती कभी तस्वीर जो तेरी;
तो हमको आज तेरी तलाश न होती।

कब उनके लबों से इज़हार होगा;
दिल के किसी कोने में हमारे लिए भी प्यार होगा;
गुज़र रही हैं अब तो यह रातें बस इसी सोच में;
कि शायद उनको भी हमारा इंतज़ार होगा।

लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया;
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा;
दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।

जज़्बात मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
अरमान मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
साथ हम दोनों का कोई बर्दाश्त नहीं करता;
जलती है देख कर दुनिया जब मैं तुमसे मिलता हूँ।

करते हैं हम तुमसे मोहब्बत;
हमारी खता यह माफ़ करना;
है अगर बदनाम मोहब्बत हमारी;
तुम प्यार को बदनाम मत करना।

तू महक बन कर मुझ से गुलाबों में मिला कर;
जिसे छू कर मैं महसूस कर सकूँ;
तू मस्ती की तरह मुझ से शराबों में मिला कर;
मैं भी इंसान हूँ, डर मुझ को भी है बहक जाने का;
इस वास्ते तू मुझ से हिजाबों में मिला कर।

आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते;
होंठों से हम कुछ कह नहीं सकते;
कैसे बयाँ करें हम यह हाल-ए-दिल आपको;
कि तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते।

न आज लुत्फ़ कर इतना कि कल गुज़र न सके;
वह रात जो कि तेरे गेसुओं की रात नहीं;
यह आरजू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम;
विसाले यार फकत आरजू की बात नहीं।

आपसे दूर भला हम कैसे रह पाते;
दिल से आपको कैसे भुला पाते;
काश कि आप इस दिल के अलावा आईने में भी रहते;
देखते जब आइना खुद को देखने को तो वहाँ भी आप ही नज़र आते।

चाहतों ने किया मुझ पे ऐसा असर;
जहाँ देखूं मैं देखूं तुझे हमसफ़र;
मेरी खामोशियाँ भी जुबान बन गयी;
मेरी बेचैनियां इश्क़ की दास्तान बन गयी।

आप को देख कर यह निगाह रुक जाएगी;
ख़ामोशी अब हर बात कह जाएगी;
पढ़ लो अब इन आँखों में अपनी मोहब्बत;
कसम से सारी कायनात इसे सुनने को थम जाएगी।

ना मैं ख्याल में तेरे ना मैं गुमान में हूँ;
यकीन दिल को नहीं है कि इस जहान में हूँ;
खुदाया रखियेगा दुनिया में सरफ़राज़ मुझे;
मैं पहले इश्क़ के, पहले इम्तिहान में हूँ।

रूठी हो अगर ज़िंदगी तो मना लेंगे हम;
मिले जो गम अगर वो भी सह लेंगे हम;
बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो;
निकलते हुए आँसुओं में भी मुस्कुरा लेंगे हम।

यूँ नज़रों से आपने बात की और दिल चुरा ले गए;
हम तो समझे थे अजनबी आपको;
पर दे कर बस एक मुस्कुराहट अपनी;
आप तो हमें अपना बना गए।

इश्क़ में हर लम्हा ख़ुशी का एहसास बन जाता है;
दीदार-ए-यार भी खुदा का दीदार बन जाता है;
जब होता है नशा मोहब्बत का;
तो अक्सर आईना भी ख्वाब बन जाता है।

इत्तेफ़ाक़ से यह हादसा हुआ है;
चाहत से मेरा वास्ता हुआ है;
दूर रह कर बड़ा बेताब था दिल;
पास आ कर भी हाल बुरा हुआ है।

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही;
अब रातों को जागना अच्छा लगता है;
मुझे नहीं मालूम वो मेरी किस्मत में है या नहीं;
मगर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है।

कब तक वो मेरा होने से इंकार करेगा;
खुद टूट कर वो एक दिन मुझसे प्यार करेगा;
इश्क़ की आग में उसको इतना जला देंगे;
कि इज़हार वो मुझसे सर-ए-बाजार करेगा।

कैसे कहूँ कि अपना बना लो मुझे;
बाहों में अपनी समा लो मुझे;
बिन तुम्हारे एक पल भी कटता नहीं;
आ कर एक बार मुझ से चुरा लो मुझे।

दूरियों की ना परवाह कीजिये;
दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये;
कहीं दूर नहीं हैं हम आपसे;
बस अपनी पलकों को आँखों से मिला लीजिये।

सीने में दिल तो हर एक के होता है;
लेकिन हर एक दिल में प्यार नहीं होता;
प्यार करने के लिए तो दिल होता है;
दिल में छुपाने के लिए प्यार नहीं होता।

अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा;
जिस पर तेरा नाम लिखा है उस तारे को ढूँढूँगा;
तुम भी हर शब दिया जला कर पलकों की दहलीज़ पर रखना;
मैं भी रोज़ एक ख़्वाब तुम्हारे शहर की जानिब भेजूँगा।

इश्क़ फिर वो रंग लाया है कि जी जाने है;
दिल का ये रंग बनाया है कि जी जाने है;
नाज़ उठाने में जफ़ाएं तो उठाई लेकिन;
लुत्फ़ भी ऐसा उठाया है कि जी जाने है।

मैं तेरे प्यार में इतना ग़ुम होने लगा हूँ;
जहाँ भी जाऊं बस तुम्हें ही सामने पाने लगा हूँ;
हालात यह हैं कि हर चेहरे में तू ही तू दिखता है;
ऐ मेरे खुदा अब तो मैं खुद को भी भुलाने लगा हूँ।

दिल के लुट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं;
यह तमाशा सरे बाजार ज़रूरी तो नहीं;
मुझे था इश्क़ तेरी रूह से और अब भी है;
जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं।

दुःख में ख़ुशी की वजह बनती है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनती है मोहब्बत;
जब कुछ भी अच्छा ना लगे हमें दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत।

फूलों की याद आती है काँटों को छूने पर;
रिश्तों की समझ आती है फासलों पे रहने पर;
कुछ जज़्बात ऐसे भी होते हैं जो आँखों से बयां नहीं होते;
वो तो महसूस होते हैं ज़ुबान से कहने पर।

तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िंदगी अपनी तेरी चाहत में सवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी;
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।

अब आएं या न आएं इधर पूछते चलो;
क्या चाहती है उनकी नज़र पूछते चलो;
हम से अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ;
यारो कोई तो उनकी ख़बर पूछते चलो।

फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम;
प्यार में झलकता जाम हो तुम;
सीने में छुपाये फिरते हैं चाहत तुम्हारी;
तभी तो मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।

अगर मैं हद से गुज़र जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
तेरे दिल में उतर जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
रात में तुझे तेरे दीदार की खातिर;
अगर मैं सब कुछ भूल जाऊं तो मुझे माफ़ करना।

माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उसके दिल में, उसकी यादो में कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।

ऐसा जगाया आपने कि अब तक ना सो सके;
यूँ रुलाया आपने कि महफ़िल में हम ना रो सके;
ना जाने क्या बात है आप में सनम;
माना है जबसे तुम्हें अपना किसी के ना हम हो सके।

लाख बंदिशें लगा दे यह दुनिया हम पर;
मगर दिल पर काबू हम कर नहीं पायेंगे;
वो लम्हा आखिरी होगा हमारी ज़िन्दगी का;
जिस पल हम तुझे इस दिल से भूल जायेंगे।

किसी पत्थर में मूर्त है, कोई पत्थर की मूर्त है;
लो हम ने देख ली दुनिया, जो इतनी खूबसूरत है;
ज़माना अपनी न समझे कभी पर मुझे खबर है;
कि तुझे मेरी ज़रूरत है और मुझे तेरी ज़रूरत है।

तेरा एहसान हम कभी चुका नहीं सकते;
तू अगर माँगे जान तो इंकार कर नहीं सकते;
माना कि ज़िंदगी लेती है इम्तिहान बहुत;
तू अगर हो हमारे साथ तो हम कभी हार नहीं सकते।

आँखों में चाहत दिल में कशिश है;
फिर क्यों ना जाने मुलाकात में बंदिश है;
मोहब्बत है हम दोनों को एक-दूसरे से;
फिर भी दिलों में ना जाने यह रंजिश क्यों है।

कुछ उलझे हुए सवालों से डरता है दिल;
ना जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल;
किसी को पा लेना कोई बड़ी बात तो नहीं;
पर उनको खोने से डरता है यह दिल।

क्या मांगू खुदा से तुम्हें पाने के बाद;
किसका करूँ इंतज़ार तेरे आने के बाद;
क्यों इश्क़ में जान लुटा देते हैं लोग;
मैंने भी यह जाना तुमसे इश्क़ करने के बाद।

दुःख में ख़ुशी की वजह बनी है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनी है मोहब्बत;
जब कुछ भी ना रहा था अच्छा इस दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनी है यह मोहब्बत।

मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा होगा;
बन के रूह मेरे जिस्म में उतर जाओ तो अच्छा होगा;
किसी रात तेरी गोद में सिर रख के सो जाऊं;
फिर उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा होगा।

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है;
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है;
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है;
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है।

माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उस के दिल मे, उसकी यादो मे कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।

करिये तो कोशिश हमको याद करने की;
फुर्सत के लम्हे तो अपने आप मिल जायेंगे;
दिल में अगर है चाहत हमसे मिलने की;
बहाने मिलने के खुद-ब-खुद बन जायेंगे।

रात होगी तो चाँद दुहाई देगा;
ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा;
ये मोहब्बत है ज़रा सोच कर करना;
एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा।

ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा;
क्योंकि हशर की परवाह मैं नहीं करता;
फनाह होना तो रिवायत है तेरी;
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।

जो रहते हैं दिल में वो जुदा नहीं होते;
कुछ एहसास लफ़्ज़ों से बयां नहीं होते;
एक हसरत है कि उनको मनाये कभी;
एक वो हैं कि कभी खफा नहीं होते।

तू ही मिल जाये मुझे ये ही काफ़ी है;
मेरी हर साँस ने बस यही दुआ माँगी है;
जाने क्यों दिल खींचा जाता है तेरी तरफ़;
क्या तुमने भी मुझे पाने की कोई दुआ माँगी है।

ज़िंदगी जीने के लिए मुझे दुआ चाहिए;
उस पर किस्मत की भी वफ़ा चाहिए;
खुदा के रहम से सब कुछ है मेरे पास;
बस प्यार करने के लिए आप जैसा कोई महबूब चाहिए।

चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;
मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;
देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना;
अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं।

कभी मोहब्बत करो तो हमसे करना;
दिल की बात जुबाँ पर आये तो हम से कहना;
न कह सको कुछ तो आँखें झुका लेना;
हम समझ जायेंगे हमें तुम न कुछ कहना।

ज़माने भर में आशिक कोई हमसा नही होगा;
खूबसूरत सनम भी कोई तुमसा नहीं होगा;
मर भी जाये उसकी बाहों में तो कोई गम नही यारो;
क्योंकी उसके आँचल से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होगा।

जो एक बार दिल में बस जाये उसे हम निकाल नहीं सकते;
जिसे दिल अपना बना ले उसे फिर कभी भुला नहीं सकते;
वो जहाँ भी रहे ऐ खुदा हमेशा खुश रहे;
उनके लिए कितना प्यार है हमें ये कभी हम जता नहीं सकते।

बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हें;
बड़ी दुआओं से पाया है तुम्हें;
तुम ने भुलाने का सोचा भी कैसे;
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।

हर घडी एक नाम याद आता है;
कभी सुबह, कभी शाम याद आता है;
सोचते हैं हम कि कर लें फिर से मोहब्बत;
फिर हमें मोहब्बत का अंजाम याद आता है।

इस दिल की हर धड़कन का एहसास हो तुम;
तुम क्या जानो हमारे लिए कितने ख़ास हो तुम;
जुदा होकर तुमने हमे मौत से भी बदतर सज़ा दी है;
फिर भी इस तड़पते हुए दिल ने तुम्हें खुश रहने की दुआ दी है।

उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था;
कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था;
बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम;
प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।

प्यासी ये निगाहें तरसती रहती हैं;
तेरी याद में अक्सर बरसती रहती हैं;
हम तेरे ख्यालों में डूबे रहते हैं;
और ये ज़ालिम दुनिया हम पे हँसती रहती है।

चाहत के ये कैसे अफ़साने हुए;
खुद नज़रों में अपनी बेगाने हुए;
अब दुनिया की नहीं कोई परवाह हमें;
इश्क़ में तेरे इस कदर दीवाने हुए।

तेरी आवाज़ तेरे रूप की पहचान है;
तेरे दिल की धड़कन में दिल की जान है;
ना सुनूं जिस दिन तेरी बातें;
लगता है उस रोज़ ये जिस्म बेजान है।

ना दिल से होता है, ना दिमाग से होता है;
ये प्यार तो इत्तेफ़ाक़ से होता है;
पर प्यार करके प्यार ही मिले;
ये इत्तेफ़ाक़ भी किसी-किसी के साथ होता है।

फिर से वो सपना सजाने चला हूँ;
उमीदों के सहारे दिल लगाने चला हूँ;
पता है कि अंजाम बुरा ही होगा मेरा;
फिर भी किसी को अपना बनाने चला हूँ।

आईने में भी खुद को झांक कर देखा;
खुद को भी हमने तनहा करके देखा;
पता चल गया हमें कितनी मोहब्बत है आपसे;
जब तेरी याद को दिल से जुदा करके देखा।

देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं;
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं;
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर;
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।

बेवजह हम वजह ढूंढ़ते हैं तेरे पास आने को;
ये दिल बेकरार है तुझे धड़कन में बसाने को;
बुझी नहीं प्यास इन होंठों की अभी;
न जाने कब मिलेगा सुकून तेरे इस दीवाने को।

यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन;
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे;
बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;
ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।

तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है;
हर पल अधूरी सी लगती है;
अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे;
क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।

तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे;
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे;
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो;
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।

संगमरमर के महल में तेरी ही तस्वीर सजाऊंगा;
मेरे इस दिल में ऐ प्यार तेरे ही ख्वाब सजाऊंगा;
यूँ एक बार आजमा के देख तेरे दिल में बस जाऊंगा;
मैं तो प्यार का हूँ प्यासा जो तेरे आगोश में मर जाऊॅंगा।

तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं;
गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं;
हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें;
तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।


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